रिश्तो की बदलती परिभाषा

 

Broken Chan कभी कभी रिश्ते बंधन बनकर रह जाते है। रिश्ते जो हमारे अपने होते है, जिनके साथ हम अपना बचपन गुजारते हैं, जिनके साये तले हम जिन्दगी की A B C D सीखते है – यही रिश्ते एक दिन अचानक स्वार्थी नजर आने लगते है। उनसे खुदगर्जी की बू आने लगती है। क्या अजीब बात है ना, जिनके संग बगैर कभी सारी दुनिया बेगानी लगती थी, आज उन्हीं की आहट भर पाकर मन कसैला हो जाता है। लेकिन क्या करें आदमी का स्वभाव ही कुछ ऐसा है.जो रिश्तो की परिभाषाये अपने अनुसार गढ़ता रहता है। आखिर समस्या है कहां पर ? इस विरोधाभास कि जड़ कहां है ?

रिश्ता जब नवजात होता है तब रंगहीन पानी की तरह साफ़ होता है। वक्त के साथ इसमे इच्छाओं, उम्मीदों, मजबूरियों और बंदिशों का रंगीन घोल मिलता जाता है। और एक दिन इस घोल के आर पार देखना असंभव हो जाता है। उम्र बढती है, संबंधों का दायरा बढता है, सोच बढती है और एक समय ऐसा आता है कि हर रिश्ता बराबरी का हक मांगने लगता है। और जब उम्रदराज रिश्ते इसे अपनी तौहीन मानकर हक देने से इन्कार कर देते हैं, तो युवा रिश्ते बगावत कर अपना हक छीनने की कोशिश करते है।

यही से शुरू होता है – रिश्तो का दमनचक्र। यही से पनपता है विरोधाभास।  इंसान के पास एक दिव्य शक्ति है,  वह स्वयं को सही साबित करने के लिये कल्पनीय-अकल्पनीय लिखित अलिखित बातो के पुलिन्दों मे से कोइ ना कोइ रास्ता तलाश ही लेता है, और चुंकी भगवान की नजर मे सब एक हैं इसलिये यह शक्ति सबको बराबर मात्रा मे मिली है.। विचारो की इस टकराहट का परिणाम व्यक्ति दर व्यक्ति बदलता रहता है। कही बिगड़ता है, तो कही संतुलित हो जाताहै। लेकिन अक्सर पहले वाला घटनाक्रम ही दोहराया जाता है, वो इसलिए  क्योंकि  इस दुनिया मे हमेशा से यही होता रहा है — ताकतवर कमजोर को दबाता रहा है। अनुभव उम्मीदो को दबाता रहा है। और साहस को समाज दबाता रहा है।

2 thoughts on “रिश्तो की बदलती परिभाषा

  1. रिश्तों को बिलकुल सही समझा है आपने ।वक्त के साथ इसमे इच्छओं उम्मीदों मजबूरियों और बंदिशों का रंगीन घोल मिलता जाता है. और एक दिन इस घोल के आर पार देखना असंभव हो जाता है । लेकिन कई जगह भाषाई अशुध्दियाँ खटकतीं हैं ।उदाहरणार्थ : क्युंकी नही क्यूं कि होना चाहिये ।मान्कर नही मान कर होना चाहिये, स्म्रति नही स्मृति होना चाहिये । आपके लेखनी में शक्ती है । इस लिये यह लिखने की धृष्टता कर बैठी

  2. आपकी सोद्देश्य टिप्पणी के लिये शुक्रिया.आपको मेरे विचार अच्छे लगे यह मेरे लिये खुशी की बात है.भाषा की त्रुटियो के लिये मै जरूर प्रयास करूगा.आशा है आगे से ऐसा नही होगा.और आपकी टिप्प्णीया मुझे यु ही मिलती रहेगी.मेरे लिये ये अत्यन्त आवश्यक है ताकी मुझे पता चलता रहे की मेरी दिशा सही है या नही.धन्यवाद

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