कई बार कुछ चीजें एक उम्र निकल जाने के बाद समझ आती हैं। जो फैसले कभी सही लगते थे अचानक गलत लगने लगते हैं। ये सब होता सभी के साथ है, फकॆ बस इतना है कि हर शख्स में ऐसे मौकौ का सामना करने की हिम्मत नहीं होती।
यह फिल्म एक ऐसे ही शख्स की कहानी है, जिसे हिम्मत जुटाने में पूरे 73 साल लग गये।
एल्विन स्ट्रेट दस साल से अपने भाई से नहीं मिला, यहॉ तक की दोनों में बात भी नहीं हुई, लेकिन एक दिन जब एलविन को भाई के हाटॆ-अटैक की खबर मिलती है तो वह दस साल के फासले को मिटाने का फैसला कर लेता है। समस्या मात्र इतनी है कि उसका 73 साल का जिस्म अब उसका इतना साथ नहीं देता, लेकिन शरीर की कमजोरी पर उसकी इच्छाशक्ति भारी पड़ती है, और एल्विन अपने “घास काटने वाली मशीन“, – जी हाँ, बिल्कुल सही पढा आपने – पर एक असंभव सी यात्रा पर चल पड़ता है।
कहानी बहुत आराम से चलती है, डायरेक्टर डेविड लिंच ने लोकेशंस का पूरा फायदा उठाया है। फिल्म धीमी होते हूए भी आपको कतई बोर नहीं करती। Richard Fransworth ने एल्विन के चरित्र में जान डाल दी है। गौर करने वाली बात यह है कि फिल्म की शूटिंग के दौराम रिचडॆ बोन कैंसर से जूझ रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उनका अभिनय अत्यंत सहज है। इसके लिेए उन्हें बेस्ट एक्टर के लिए अकादमी अवाडॆ में भी नामांकित किया गया था, और आज भी इस अवा़डॆ के लिए नामित होने वाले वे सबसे उम्रदराज अभिनेता हैं।
सबसे जरूरी बात – परिवार और इंसानी रिश्तों को परिभाषित करती हुइ यह फिल्म रियल लाइफ पर आधरित है।
PS: RIchard Fransworth की यह आखिरी फिल्म थी। उसी वषॆ उन्होंने आत्महत्या कर ली।
हेमंत जी,श्रीश जी के ब्लॉग से आपके बारे में पता चला। आपने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट आफ इंडिया से परा-स्नातक किया है, यह जानकर खुशी हुई। मैं भी पटकथा लेखन में रूचि रखता हूं। इस विषय पर एक एक किताब ‘हिन्दी में पटकथा लेखन’ भी लिखी है।
आपके माध्यम से फाइनल ड्राफट साफटवेयर के बारे में मालूम हुआ। यह कहां से मिल सकता है।
या तो आप फाइनल ड्राफ्ट की ऑफिशियल साइट से ऑडॆर कर सकते हैं – या फिर बाजार में ट्राई कर सकते हैं। अगर तब भी ना बात बनें तो – Torrents – के माध्यम से पाइरेटेड वजॆन डाउनलोड कर सकते हैं।